परिवार का समर्थन हो तो अन्य महिलाएं भी रच सकती हैं इस सांसद जैसा इतिहास
किसी भी समाज की उन्नति उस समाज में रहने वाली महिलाओं की उन्नति से मापी जा सकती है। अपने घर, समाज से लेकर देश की तरक्की में महिलाओं ने हर तरह से अपना योगदान दिया है। आज ऐसी ही एक महिला से हम आपको मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने राजनीतिक जीवन में आकर समाज में बहुमूल्य योगदान दिया है। हम बात कर रहे हैं सांसद रीति पाठक की।

प्रारंभिक जीवन
रीति पाठक मध्यप्रदेश के सीधी संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1977 को सिंगरौली जिले के खटकरी गांव में हुआ। उनके पिता पेशे से वकील हैं और रीवा में रहकर वकालत करते हैं। रीति की प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा रीवा से ही हुई है। उन्होंने 1999 में M.A और 2002 में LLB की पढ़ाई रीवा स्थित अवधेश नारायण सिंह विश्वविद्यालय से की है।
राजनीतिक सफर
रीति ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से साल 1994-95 में की। साल 1997 में शादी के बाद से वो 14 साल तक राजनीति से दूर रहीं। साल 2009 में वो एकबार फिर से सक्रिय राजनीति में वापस लौटती हैं और जिला पंचायत का चुनाव लड़ती हैं, जिसमें उन्होंने जीत हासिल की। पंचायत चुनाव जीतने के बाद वो जीवन में पीछे मुड़कर कभी नहीं देखती हैं। साल 2010 में वो भाजपा की सदस्यता लेती हैं। भाजपा में शामिल होने के 4 साल बाद उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचती हैं। 2014 की जीत वे 2019 में भी दोहराती हैं और दूसरी बार इस सीट से जीत दर्ज करती हैं।

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परिवार ने हमेशा साथ निभाया
अपने परिवार के बारे में बात करते हुए बताती हैं कि उनके सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत उनके पति रजनीश पाठक हैं। वो कहती हैं कि अभी तक उनका जो सफर रहा है, उसमें उनके पति का बड़ा योगदान है। वह कहती हैं कि अपनी पति की वजह से ही वह जिला पंचायत से सांसद बनने तक का सफर तय कर पाईं। रीति इस बात पर गर्व करती हैं कि वो एक ऐसी महिला हैं, जिनके अस्तित्व तथा व्यक्तित्व में एक पुरुष की वजह से निखार आया है। उनका मानना है कि परिवार का साथ आपको परिपूर्ण और परिपक्व होने में मदद करता है।
महिलाओं के लिए संदेश
रीति राजनिति में महिलाओं की भागीदारी का पुरजोर समर्थन करती हैं। वे कहती हैं कि अगर आप समाज के लिए सोचती हैं, समाज का उत्थान करना चाहती हैं तो घर से बाहर निकलिए। आप समाज के भले के लिए राजनीति को माध्यम के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं। वो मानती है कि महिलाओं में एक अलग किस्म की शक्ति होती है, जिनका इस्तेमाल वो व्यवस्था को बनाने के लिए, अच्छे-बुरे की पहचान करने के लिए करती हैं। वे कहती हैं कि बहुत सारे ऐसे कार्य, जिनको करने के लिए संवेदनाओं की जरूरत पड़ती है, उनको करने के लिए महिलाओं को राजनीति में बढ-चढ कर हिस्सा लेना चाहिए।
