अफगानिस्तान में भूकंप से भारी तबाही, 6.1 थी भूकंप की तीव्रता

अफगानिस्तान बुधवार को 6.1 की तीव्रता से अचानक आए भूकंप के झटकों से थर्रा उठा। इस दौरान अफगानिस्तान के दो प्रोविंस पार्टीका और खोस्त में भारी जानमाल का नुकसान हुआ। दोनों प्रोविंस के करीब एक हजार से अधिक लोगों की जान चली गई। यह दशक के सबसे जानलेवा भूकंप में से एक बताया जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुबह के समय ही इन दोनों प्रोविंस के कई जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

6.1 थी भूकंप की तीव्रता

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई। इतनी तीव्रता से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके एपीसेंटर और आसपास के इलाकों में किस तरह की तबाही हुई होगी।

अफगानिस्तान पर दोहरी मार

तालिबान की सरकार आने के बाद से अफगानिस्तान के आर्थिक हालात अच्छे नहीं रहे हैं। पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए इस भूकंप ने कई और मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस भूकंप के बाद अफगानिस्तान द्वारा दुनिया के कई संगठनों और देशों से मदद मांगी जा रही है।

पीएम मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दर्दनाक हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में आए विनाशकारी भूकंप की खबर से गहरा दुख हुआ है। मेरी ओर से गहरी संवेदना, जिन्होंने जान गवाई है। पीएम ने आगे लिखा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के मुश्किल समय में साथ खड़ा है और जल्द से जल्द हर संभव आपदा राहत सामग्री पहुंचाने के लिए तैयार है।

अफगानिस्तान की आवाम की सहायता के लिए भारत रहा है तत्पर

भारत सरकार के द्वारा अफगानिस्तान के लोगों को राहत पहुंचाने के लिए निरंतर कदम उठाए गए हैं। तालिबान सरकार के आने से पहले की परिस्थितियों के बीच और आज वर्तमान समय में भी भारत अफगानिस्तान की आवाम के साथ खड़ा है। पूर्व में भारत इस कड़ी में अफगानिस्तान में कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर चुका है। इसके लिए भारत ने तत्कालीन अफगान सरकार के साथ कई समझौते भी किए थे जिसके तहत सैकड़ों घर, स्कूल, सड़क निर्माण किए गए। इसके अलावा भारत कोरोना के दौर में भी अफगानिस्तान के साथ खड़ा रहा। केंद्र सरकार ने अफगानिस्तान को मुफ्त वैक्सीन और सैकड़ों मीट्रिक टन गेहूं अफगानिस्तान को दिए ताकि लोगों के आर्थिक हालात में सुधार आ सके।

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