दिव्यांग जनों के लिए वरदान साबित हो रही है केंद्र सरकार की ये योजना

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के द्वारा सहायक यंत्रों/उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए विकलांग व्यक्तियों को सहायता योजना-एपिड के माध्यम से ‘सामाजिक अधिकारिता शिविर’ का आयोजन किया गया। इस शिविर का आयोजन विकलांग व्यक्तियों के अधिकारिता विभाग (DEPwD) के सहयोग से तेजपुर, असम के सोनितपुर जिले में किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण प्रदान कर सशक्त बनाना है।

दिव्यांगजनों को बांटे गए लाखों रुपए के उपकरण

इस मौके पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की राज्यमंत्री प्रतिमा भौमिक ने 1808 दिव्यांगजनों को लाखों रुपए के उपकरण मुफ्त में वितरित किए। यह सभी लाभुक सोनितपुर जिले के विभिन्न प्रखंडों से हैं जिनका चयन स्थानीय स्तर पर पंजीकरण करने के बाद किया गया है। दिए गए उपकरणों की बात करें तो 154 मोटर चालित ट्राइसाइकिल, 231 ट्राइसाइकिल, 429 व्हीलचेयर, 832 बैसाखी, 140 वॉकिंग स्टिक, 127 रोलेटर, 60 स्मार्टफोन शामिल हैं। वहीं 183 स्मार्ट केन, 26 ब्रेल किट, 08 ब्रेल स्लेट, 02 केन, 110 सी.पी चेयर, 278 एमएसआईईडी किट, 05 एडीएल किट (कुष्ठ के लिए) सेल फोन और 852 हियरिंग एड भी बांटे गए।

2017 में की गई थी योजना की शुरुआत

केंद्र सरकार द्वारा दिव्यांगजनों को राहत पहुंचाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत 1 अप्रैल 2017 को इस योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना का उद्देश्य विकलांगों के टिकाऊ, परिष्कृत और वैज्ञानिक रूप से निर्मित, आधुनिक, मानक सहायता और उपकरणों को खरीदने में जरूरतमंद दिव्यांगजनों की सहायता करना है।
इससे दिव्यांगजनों की दिव्यांगता के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ उनकी समाजिक और शारीरिक क्षमता को बढ़ाकर उनका आर्थिक विकास किया जा सकता है।

कार्यान्वयन एजेंसी

इस योजना का कार्यान्वयन गैर-सरकारी संघटनों (NGOs), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय संस्थानों तथा भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम- एलिम्को (ALIMCO) जैसी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।

करोड़ों दिव्यांगजनों को हो रहा लाभ

जनगणना 2011 के अनुसार, भारत में लगभग 2.68 करोड़ व्यक्ति दिव्यांग हैं। इसके अलावा 14 वर्ष से कम आयु के लगभग 3 प्रतिशत बच्चों का विकास देरी से होता है। इनमें से अनेक बच्चे मानसिक मंदता (Intellectual Disability) और प्रमस्तिष्क पक्षाघात (Cerebral Palsy) से पीड़ित हैं, जिन्हें स्वयं की देखभाल तथा स्वतंत्र जीवन व्यतीत करने के लिये सहायक यंत्रों/उपकरणों की आवश्यकता होती है। इस वजह से बीते कुछ सालों से इस योजना के माध्यम से दिव्यांगजनों को न्यूनतम लागत पर सहायक यंत्र और उपकरण प्रदान करके उनका सामाजिक, आर्थिक विकास तथा व्यावसायिक पुनर्वास करने का प्रयास किया जा रहा है।

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