होलाष्टक 2025: जानें शुभ कार्यों की सीमाएं, होलिका दहन और रंग खेलने की सही तारीख: धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

प्रतापगढ़ रामानुज आश्रम आज 7 मार्च शुक्रवार से होलाष्टक प्रारंभ हो गया है। होलाष्टक फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक रहेगा। सबकी रंग भरी आमलकी एकादशी दिनांक 10 मार्च को है। सामान्यतः यदि पूर्णिमा को प्रदोष काल में जो की भद्रा रहित भी होनी चाहिए में होलिका का दहन हो रहा हो तो चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को सभी जगह रंग की होली होती है। परंतु यह चतुर्दशी युक्त पूर्णिमा अर्थात ऐसी पूर्णिमा जो सूर्योदय के समय पर ना हो को होलिका दहन वह भी भद्रोपरांत हो रहा हो तो ऐसे में शास्त्रीय मत से होली कब होगी।
इसलिए आइए देखें इस वर्ष की स्थिति तारीख 13 मार्च को सूर्योदय के समय चतुर्दशी है वह दिन 11:7 पर पूर्णिमा लग रही है और होलिका दहन भी तारीख 13 को भद्रा के बाद रात 11:49 पर होगा अतः इस वर्ष 14 मार्च 2025 को रंग की होली होगी ।13 मार्च को होली जलाई जाएगी तथा 14 मार्च को रंग भरी होली खेली जाएगी।
होलाष्टक की अवधि में विवाह मुंडन नामकरण और गृह प्रवेश समेत समस्त शुभ संस्कार नहीं किए जाते हैं। होलाष्टक के समय नए घर के निर्माण का आरंभ नहीं करना चाहिए और होलाष्टक के समय सोना चांदी संपत्ति और वाहन नहीं खरीदना चाहिए। होलाष्टक के समय नया कारोबार भी नहीं शुरू करना चाहिए और होलाष्टक के समय विद्यारंभ भी नहीं करना चाहिए।
होलाष्टक के दिनों में ही संवत और होलिका की प्रतीक लकड़ी या डंडे को गाड़ा जाता है तथा इस स्थान पर गाय के गोबर से बनी उपली को रखा जाता है। इस समय में अलग-अलग दिन अलग-अलग चीजों से होली खेलते हैं पूरे समय में भगवान श्री कृष्ण एवं शिव जी की उपासना की जाती है।
ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना चाहिए। हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए दान देना चाहिए। किसी का धन हरण नहीं करना चाहिए।

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