इस विधि से करें वरुथिनी एकादशी का व्रत, इससे प्राप्त पुण्य की संख्या बताने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं

वरुथिनी एकादशी की बहुत-बहुत बधाई बहुत-बहुत मंगल कामनाएं ।
बैसाख मास कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी 24 अप्रैल गुरुवार को है।
युधिष्ठिर ने कहा, हे वासुदेव आपको नमस्कार है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में किस नाम की एकादशी होती है उसकी महिमा बताइए। भगवान श्री कृष्ण बोले राजन वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी वरुथिनी के नाम से प्रसिद्ध है यह इस लोक और परलोक में भी सौभाग्य प्रदान करने वाली है। वरुथिनी के व्रत से ही सदा सौख्य का लाभ और पाप की हानि होती है। यह समस्त लोगों को भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली है। वरुथिनी के ही व्रत से मांधाता तथा धुंधमार आदि अनेक राजा स्वर्गलोक को प्राप्त हुए हैं। जो 10000 वर्षों तक तपस्या करता है उसके समान ही फल वरुथिनी के व्रत से भी मनुष्य प्राप्त कर लेता है। नृप श्रेष्ठ घोड़े के दान से हाथी का दान श्रेष्ठ है। भूमि दान उससे भी बड़ा है, भूमि दान से भी अधिक महत्व तिल दान का है। तिल दान से बढ़कर स्वर्ण दान और स्वर्ण दान से बढ़कर अन्नदान है क्योंकि देवता पितर तथा मनुष्यों को अन्न से ही तृप्ति होती है। विद्वान पुरुषों ने कन्यादान को भी अन्नदान के ही समान बताया है। कन्यादान के तुल्य ही धेनु का दान है,यह साक्षात भगवान का कथन है। ऊपर बताए हुए सब दानों से बड़ा विद्या दान है। मनुष्य वरुथिनी एकादशी का व्रत करके विद्या दान का भी फल प्राप्त कर लेता है। जो लोग पाप से मोहित होकर कन्या के धन से जीविका चलाते हैं वह पुण्य क्षय होने पर यातनामय नर्क में जाते हैं। अतः सर्वथा प्रयत्न करके कन्या के धन से बचना चाहिए उसे अपने काम में नहीं लाना चाहिए।
जो अपनी शक्ति के अनुसार आभूषणों से सुसज्जित करके पवित्र भाव से कन्या का दान करता है उसके पुण्य की संख्या बताने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं।
वरुथिनी एकादशी करके भी मनुष्य उसी के समान फल प्राप्त करता है ।व्रत करने वाला वैष्णव पुरुष दशमी तिथि को कांस उड़द मसूर चना कोदो शाक मधु दूसरे का अन्न दो बार भोजन तथा मैथुन इन 10 वस्तुओं का परित्याग कर दे। एकादशी को जुआ खेलना नींद लेना पान खाना दातुन करना दूसरे की निंदा करना चुगली खाना चोरी हिंसा मैथुन क्रोध तथा असत्य भाषण इन 11 बातों को त्याग दे। द्वादशी को कांस उड़द शराब मधु तेल पतितों से वार्तालाप व्यायाम प्रदेश गमन दो बार भोजन मैथुन बैल की पीठ पर सवारी और मसूर इन 12 वस्तुओं का त्याग करें।
राजन इस विधि से वरुथिनी एकादशी की जाती है। रात को जागरण करके जो भगवान मधुसूदन का पूजन करते हैं वह सब पापों से मुक्त हो परम गति को प्राप्त होते हैं।
अतः पाप भीरु मनुष्यों को पूर्ण प्रयत्न करके इस एकादशी का व्रत करना चाहिए। यमराज से डरने वाला मनुष्य अवश्य वरुथिनी का व्रत करें। दंतधावन का मतलब है उस दिन दातुन नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि वृक्ष सजीव होते हैं। इसलिए एकादशी की पूर्व संध्या पर दातुन तोड़ कर रख लेना चाहिए ।राजन इसके पढ़ने और सुनने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है और मनुष्य सब पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक में प्रतिष्ठित होता है।


धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुदास रामानुज आश्रम संत रामानुज मार्ग शिवजीपुरम प्रतापगढ़
कृपा पात्र श्री श्री 1008 स्वामी श्री इंदिरा रमणाचार्य पीठाधीश्वर श्री जियर स्वामी मठ जगन्नाथ पुरी एवं पीठाधीश्वर श्री नैमिषनाथ भगवान रामानुज कोट अष्टंम भू बैकुंठ नैमिषारण्य। पारणा शुक्रवार को प्रात 8:20  तक।

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