केंद्र सरकार के इन ऐतिहासिक कदमों से खेल और खिलाड़ियों को मिल रही मजबूती

हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज हम हर क्षेत्र में लगातार तेजी से विकास कर रहे हैं, चाहे बात शिक्षा की हो साइन्स या इकॉनमी की, भारत का ग्रोथ रेट दुनिया के कई विकसित मुल्कों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। लेकिन बात जब खेल के मैदान की आती है तो हमारी नाव दशकों से डगमगाती रही है, ओलंपिक हो या कॉमनवेल्थ हमारी मेडल्स टैली कोई खास नहीं रही है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए बीते 8 साल में केंद्र सरकार के द्वारा खेल के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव किए गए हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा खिलाड़ियों और खेल को मजबूती प्रदान करने के लिए दर्जनों योजनाएं शुरू की गई हैं। वहीं खिलाड़ियों के बेहतर प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण आहार के लिए भी सरकार द्वारा बजट में बढ़ोतरी की गई है। इसी कड़ी में आज केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने गुजरात के केवड़िया में दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री सम्मेलन का उद्घाटन किया। आइए विस्तार से जानते हैं इस सम्मेलन का महत्व…

दो दिवसीय खेल मंत्री सम्मेलन का आयोजन

दो दिवसीय इस सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्री और सचिव भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश में खेल और खिलाड़ियों के उत्थान को लेकर विचार-विमर्श करना है। इस सम्मेलन में खेलो इंडिया योजना के विभिन्न पहलुओं जैसे खेल के मैदानों की जियो टैगिंग, राज्यों में प्रशिक्षण केंद्र एवं अकादमी, खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभा पहचान और विकास, महिलाओं के लिए खेल को बढ़ावा देना, विकलांग व्यक्तियों, आदिवासियों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वदेशी खेल और शिक्षा का महत्व और डोपिंग रोधी जागरूकता, खेल को समर्थन करने वाले पेशेवरों के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इस सम्मेलन से इतर केंद्र सरकार द्वारा बीते कुछ साल में बड़े कदम उठाए गए हैं। चलिए अब उनके बारे में जानते हैं…

• राष्ट्रीय खेल महासंघ के द्वारा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर प्रदान किया जा रहा है।

• टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के तहत ओलंपिक खेलों और एशियाई खेलों सहित अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पदक जीतने की संभावना वाले खिलाड़ियों को खास प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

• पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय कल्याण कोष के तहत विकट परिस्थितियों में रहने वाले खिलाड़ियों एवं मृत खिलाड़ियों के परिवारों को 5 लाख की सहायता राशि दी जाती है।

• ओलंपिक और एशियाई खेलों सहित अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की तैयारी के लिए खिलाड़ियों को भारत और विदेशों में प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं

• सरकार भारतीय और विदेशी कोचों की भर्ती, सहयोगी स्टाफ एवं अन्य योग्य लोगों की नियुक्ति कर रहा है।

• खिलाड़ियों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण उपकरण मुहैया करवाए जा रहे हैं।

इन सबके अलावा सरकार के द्वारा वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए ओलंपिक खेलों, पैरा ओलंपिक खेलों, एशियाई खेलों, पैरा एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं और मेधावी खिलाड़ियों के लिए पेंशन योजना लागू की गई है जिसके तहत खिलाड़ियों को 20 हजार रुपए तक प्रति माह पेंशन दिया जाता है। जाहिर है पिछले कुछ साल में देश में खेल का माहौल बदला है। आज खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा विभिन्न मौकों पर उनसे निरंतर बातचीत की जाती है। प्रतिस्पर्धा में खिलाड़ियों का मानसिक रूप से मजबूत होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में देश के मुखिया होने के नाते अगर बराबर तवज्जो हारने और जीतने वाले दोनों खिलाड़ियों को दी जाती हो तो स्वाभाविक है वह बेखौफ होकर मैदान पर खेलेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.