प्रयागराज महाकुंभ: जाने कैसे नाविक पिंटू महरा का परिवार बना करोड़पति, 130 नावों से 30 करोड़ की कमाई!
45 दिनों में 30 करोड़ की कमाई, योगी आदित्यनाथ ने की तारीफ
महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज के नाविक पिंटू महरा का परिवार चर्चा में आ गया है। 45 दिनों में उनकी 130 नावों ने 30 करोड़ रुपये की कमाई की। उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात का जिक्र किया, जिससे यह परिवार सुर्खियों में आ गया।

पिंटू महरा का परिवार अरैल गांव में रहता है और नाव चलाने का काम उनकी पीढ़ियों से आजीविका का साधन रहा है। लेकिन इस बार महाकुंभ में सही रणनीति और मेहनत से उन्होंने करोड़ों की कमाई कर ली
गहने बेचे, जमीन गिरवी रखी, 70 नई नावें खरीदीं – और बदल गई किस्मत!
पिंटू महरा ने महाकुंभ से पहले ही भविष्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा जोखिम उठाया। उन्होंने घर की महिलाओं के गहने बेचे, जमीन गिरवी रखी और 70 नई नावें खरीदीं। इससे उनकी कुल नावों की संख्या 130 हो गई।
महाकुंभ में दूर-दूर से श्रद्धालु संगम में स्नान के लिए आए और नौकायन की भारी मांग रही। इसका फायदा उठाते हुए पिंटू महरा के परिवार ने हर नाव का किराया 1000-1500 रुपये प्रति ट्रिप तक रखा, जिससे उनकी कमाई करोड़ों में पहुंच गई।
अपराध की छाया से निकलकर ईमानदारी से करोड़ों कमाए!
पिंटू महरा का परिवार पहले विवादों में रहा था। उनके पिता बच्चा महरा का नाम आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा था। उनकी इलाके में स्थानीय गैंगस्टर पप्पू गंजिया से पुरानी दुश्मनी थी।
बच्चा महरा की जेल में मौत हो गई, जिसके बाद पिंटू ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने अपराध से दूरी बनाकर बिजनेस पर ध्यान केंद्रित किया और नाव चलाने के पारंपरिक धंधे को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया।
परिवार को बिजली विभाग से 2 करोड़ का ठेका, जीवनशैली में आया बड़ा बदलाव
पिंटू महरा की मां शकुंतला देवी भी अब बिजनेस में आगे बढ़ रही हैं। वह बिजली विभाग की पंजीकृत ठेकेदार हैं और महाकुंभ के दौरान 2 करोड़ रुपये का सरकारी ठेका भी उन्हें मिला।
इतनी बड़ी कमाई के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल गई। जो परिवार पहले सिर्फ नाव चलाकर सीमित आमदनी कमाता था, अब करोड़ों की कमाई कर चुका है। उनके रहन-सहन और सामाजिक स्थिति में भी बदलाव देखा जा रहा है।
मेहनत, दूरदर्शिता और हिम्मत से बदली किस्मत
पिंटू महरा और उनके परिवार की यह कहानी संघर्ष, साहस और सफल व्यवसाय की मिसाल बन गई है। उन्होंने जोखिम उठाकर नावों में निवेश किया, महाकुंभ का अवसर पहचाना और सही प्लानिंग से सफलता पाई।
यह कहानी बताती है कि अगर हिम्मत और मेहनत हो तो कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है।
