प्रतापगढ़ के गौरव थे आद्या प्रसाद उम्मत : धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

प्रतापगढ़ हिंदी साहित्य के महारथी एवं अवधी भाषा के महानायक पंडित आद्या प्रसाद उन्मत्त जी के जन्मदिवस पर सर्वोदय सद्भावना संस्थान की कोविड-19 का पालन करते हुए श्रद्धांजलि बैठक धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास की अध्यक्षता में रामानुज आश्रम में संपन्न हुई।


अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए धर्माचार्य ने कहा कि उन्मत्त जी अवधी भाषा के महानायक थे। गोस्वामी तुलसीदास जी के बाद यदि किसी ने अवधी के अंतर्गत अपनी रचनाओं को प्रस्तुत करने का कार्य किया तो वह उन्मत्त जी ही थे। उन्होंने गांव गिंराव खेत खलिहान की बात किया तथा पाकिस्तान और चीन को अपनी रचनाओं के माध्यम से ललकारा। पांती के रचना के द्वारा आपने एक सैनिक की कथा को जिस मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया वह वंदनीय है। उन्मत्त जी ने राजनीतिक आध्यात्मिक साहित्यिक पत्रकारिता वकालत एवं न्यायपालिका में कार्य करते हुए उदाहरण प्रस्तुत किया।
आपकी खड़ी बोली एवं अवधी भाषा दोनों पर विशेष पकड़ थी। साहित्यिक मंचो पर अनेकों बार यदि किसी ने फूहड़ता की कविता किसी कवि ने पढ़ा होगा तो उसको उसी समय डांटकर आपने बैठा दिया। सुचिता का सदैव आप ध्यान रखते थे। हमारे पिता स्वर्गीय पंडित सूर्यबली पांडे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं लोकतंत्र रक्षक सेनानी का आप विशेष सम्मान करते थे। दास ने आपकी रचना सर्वप्रथम 1962 के युद्ध के पश्चात मेहता पाठशाला के अंतर्गत हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में श्रवण किया था।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से संतोष दुबे पूर्व सभासद दिनेश शर्मा प्रतिनिधि मंत्री डॉक्टर महेंद्र सिंह पत्रकार एवं कवि राजन जी पत्रकार डॉ अनूप कुमार पांडे आचार्य कमलेश तिवारी ज्ञानेश्वर तिवारी सुदर्शनाचार्य रामनरेश पांडे रामानुज दास रंगनाथ पांडेय गिरीश मिश्रा आलोक सिंह राकेश सिंह ने आपको अवधी भाषा की रचनाओं का सम्राट कहते हुए अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

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