प्रत्येक दिवस का शुभारंभ होता है मातृ दिवस से :–धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

प्रतापगढ़। मई माह के दूसरे रविवार को मदर्स डे सनातन धर्मियों द्वारा भी मनाया गया दास को अत्यंत दुखित हुआ।
मैंने व्हाट्सएप और फेसबुक पर देखा कि तमाम महिलाओं ने हिस्सा लिया और बड़ी प्रसन्नता से सेल्फी खींच खींच कर व्हाट्सएप और फेसबुक पर डालीं।
मदर्स डे के विषय में कुछ लोग शायद जानते भी होंगे और कुछ नहीं जानते किंतु दासानुदास कहना चाहता है कि इसकी वास्तविकता क्या है? और सनातन धर्म में माता का क्या महत्व है? क्या एक दिन मदर्स डे मना लेने से मां के उस दूध के कर्ज को आप अदा कर सकते हैं, या पैदा होते समय जो कष्ट मां को हुआ है। मां को उस कर्ज के भार से उरिण हो पाएंगे।
आइए हम जानते हैं किस ने इसकी शुरुआत किया था। 1905 में अन्ना जीवर्स नाम की वर्जिनियां की एक महिला थी, उसकी मां का नाम एन रीव्स जीवर्स था। जिसकी वह सेवा नहीं करती थी। जिसके कारण से नाराज होकर के वह कहीं चली गई उसके खो जाने के बाद वह लोगों को दिखाने के लिए कि मैं अपनी मां से बहुत प्यार करती हूं उसको ढूंढना शुरू किया। वह नहीं मिली अंत में उसके मित्रों ने एक पार्टी दिया और उस दिन का नाम मदर्स डे रख दिया जो अप्रैल माह के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।
हमारे सनातन धर्म में मां का दर्जा बहुत ही अहम है वेदों में मां को अंबा, अंबिका, दुर्गा ,देवी, सरस्वती ,शक्ति, ज्योति आदि नामों से संबोधित किया गया है। इसके अतिरिक्त मां माता मातृ माई अम्मा जन्म दात्री आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
प्रभु श्री राम ने कहा है “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” ।
द्वापरयुग के अंतर्गत वनवास के समय यक्ष ने धर्मराज युधिष्ठिर से प्रश्न किया कि भूमि से भारी कौन है। युधिष्ठिर ने कहा “माता गुरु तरा भूमेरु” अर्थात माता इस भूमि से भी भारी है।
वेदव्यास जी स्कंद पुराण में लिखते हैं।
नास्ति मातृ समा छाया ,नास्ति मातृ समा गति:।
नास्ति मातृ समं त्राण, नास्ति मातृ समा प्रिया ।
माता के समान कोई छाया नहीं है, माता के समान कोई सहारा नहीं है। माता के समान कोई रक्षक नहीं और माता के समान कोई भी वस्तु नहीं है।
तैत्तिरीय उपनिषद में वर्णन है। “मातृ देवो भव” माता देवताओं से भी बढ़कर है।
शतपथ ब्राह्मण में कहा गया है।
अथ शिक्षा प्रवक्षयामि।
मातृमान पितृ माना चार्यवान पुरुषो वेद: अर्थात जब तीन उत्तम शिक्षक अर्थात माता-पिता आचार्य हो तभी मनुष्य गुणवान होता है।
हमारे यहां सनातन धर्म में मां से बढ़कर कोई नहीं है प्रभु श्री राम जब प्रातः उठते हैं तो सर्वप्रथम
प्रात काल प्रभु उठि रघुनाथा। मात पिता गुरु नावंहि माथा।। पश्चिमी सभ्यता के लोग मदर्स डे के दिन पार्टी में शराब पीते हैं लेकिन हमारे मातृ दिवस दोनों नवरात्रि में 9 दिन मां के रूप में मां दुर्गा की पूजा की जाती है और नवरात्र में मांस मदिरा का सेवन करने वाले लोग भी मांस मदिरा का परित्याग करते हैं।
मां के ना रहने पर उन्हें पिंडदान करते हैं उनका श्राद्ध करते हैं। इसलिए सनातन धर्म का पालन करते हुए अपना जीवन यापन करना चाहिए। हमें पश्चिमी सभ्यता की ओर नहीं भागना चाहिए। माता लक्ष्मी इस संसार के सभी जीवों की मां है और भगवान श्रीमन्नारायण पिता है।
दासानुदास ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास रामानुज आश्रम संत रामानुज मार्ग शिव जी पुरम प्रतापगढ़
कृपा पात्र श्री श्री 1008 स्वामी श्री इंदिरा रमणा चार पीठाधीश्वर श्री जीयर स्वामी जगन्नाथ पुरी

Leave a Reply

Your email address will not be published.