रक्षाबंधन पर्व 11 अगस्त को रात्रि 8:30 के बाद मनाए : धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

रक्षाबंधन का पावन पर्व श्रावण मास पूर्णिमा के दिन है इस पर कुछ लोगों ने दास से जिज्ञासा व्यक्त किया कि कब मनाना चाहिए और कब नहीं मनाना चाहिए इस पर श्री राम मंदिर मुंबई के बड़गादी स्वामी मुंबई एवं रामानुज पंचांगम के प्रधान संपादक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ पंडित रामनारायण शास्त्री जी से विचार-विमर्श करने के पश्चात दास इस निर्णय पर पहुंचा है कि रक्षाबंधन 11 तारीख को 8 बज कर 30 मिनट रात्रि के पश्चात मनाया जाए इस संबंध में शास्त्र सम्मत बातें आपके समक्ष दास प्रस्तुत कर रहा है।

रक्षाबंधन कभी भी भद्रा में नही करना चाहिये। चाहे भद्रा कहीं भी हो ।

इदं भद्रायां न कार्यम् -।
भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी।।
अर्थ -भद्रा में श्रावणी यानी रक्षाबंधन और होलिकादहन नहीं करना चाहिये। भद्रा में रक्षाबंधन करने से राजा को हानि होती है तथा भद्रा में होलिका दहन करने से गांव की हानि होती है।

निर्णय सिन्धु पृष्ट संख्या 203

तत्सत्वे तु रात्रौ-अपि तदन्ते कुर्यात्_ इति निर्णयामृते।
निर्णयामृत के अनुसार भद्रा के अन्त में रात्रि में भी करना चाहिये।
इदं तु प्रतिपद्-युक्तां न कार्यम्।
रक्षाबंधन प्रतिपदायुक्त पूर्णिमा में नही करना चाहिये।
इदं रक्षाबंधनं नियतकालत्वात् भद्रावर्ज्य ग्रहणदिनेsपि कार्यम्।
यदि पूर्णिमा के दिन चन्द्रग्रहण हो तो भी भद्रा के बाद रक्षाबंधन करना चाहिये।

स्पष्ट निर्णय:-

1. भद्रा के बाद रक्षाबंधन करना चाहिये।
2. भद्रा के बाद रात्रि में भी रक्षाबंधन कर सकते हैं।
3. प्रतिपदायुक्त पूर्णिमा में रक्षाबंधन नही करना चाहिये।
4. यदि पूर्णिमा (रक्षाबंधन) को चन्द्रग्रहण हो तो भी भद्रा के बाद रक्षाबंधन करना चाहिये।

निर्णय :-

इस प्रकार रात्रि 8:27 के पश्चात रक्षाबंधन पर्व का शुभ मुहूर्त रहेगा गुरुवार को प्रातः 9:18 तक चतुर्दशी रहेगी इसके बाद पूर्णिमा एवं श्रवण नक्षत्र रहेगा इसी समय भद्रा प्रारंभ होगी 8:27 रात तक रहेगी। चतुर्दशी में श्रावणी पर्व नहीं मनाना चाहिए शुक्रवार को प्रातः 6:59 तक पूर्णिमा रहेगी बाद में प्रतिपदा रहेगी प्रतिपदा युक्त पूर्णिमा में पर्व नहीं मनाना चाहिए ऋग्वेद श्रवण नक्षत्र को महत्व देते हैं यजुर्वेदी पूर्णिमा को महत्व देते हैं ।
अतः 11 अगस्त 2022 को ही रात्रि 8:27 के बाद रक्षाबंधन का पर्व मनाना चाहिए।
ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास रामानुज आश्रम संत रामानुज मार्ग जी पुरम प्रतापगढ़।

नोट:– इसका समर्थन जयतु ज्योतिषम संस्थान एवं आदि गुरु शंकराचार्य न्यास ने भी किया है।

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