कामदा एकादशी सभी पापों को हरने वाली है :–धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुजदास
कामदा एकादशी की बहुत-बहुत बधाई
दिनांक 29 मार्च दिन रविवार को को सबकी कामदा एकादशी है।
एक बार धर्मराज युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा हे राजन चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम कामदा एकादशी है।
महराज दिलीप के पूछने पर वशिष्ठ जी ने कहा था। चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी परम पुण्यमई है। पाप रूपी ईधन के लिए तो वह दावानल ही है। प्राचीन काल की बात है नागपुर नामक एक सुंदर नगर में पुंडरीक नाम का भयंकर नाग निवास करता था। पुंडरीक नाग उन दिनों वहां गंधर्व किन्नर और अप्सराओं की नगर में सेवा लिया करता था। एक दिन वहां की एक श्रेष्ठ अप्सरा जिसका नाम ललिता था उसके साथ ललित नाम का गंधर्व रहता था। ललिता उस समय महल में नहीं थी और ललित नागराज पुंडरीक की राजसभा में मनोरंजन कर रहा था। गाते-गाते ललिता की याद के कारण उसके पैरों की गति रुक गई और जीभ लड़खड़ाने लगी।
नागों में श्रेष्ठ कार्कोटक नामक नाग ने इस बात को नागराज पुंडरीक से बता दिया। जिसके कारण पुंडरीक ने श्राप दे दिया। ललिता के प्रति तू आसक्त हो गया है इसलिए तू राक्षस हो जा।
ललित राक्षस होकर इधर-उधर भ्रमण करने लगा उसकी पत्नी ललिता रोते हुए जंगलों में अपने पति के पीछे घूमती रहती।
एक दिन एक सुंदर आश्रम में श्रृंगी ऋषि दिखाई दिए जो शांत स्वरूप में बैठे थे, मुनि बड़े दयालु थे ललिता ने श्रृंगी जी से निवेदन किया ।हे प्रभु मैं वीरधन्वा नाम के गंधर्व की कन्या हूं।हे महात्मा मेरा नाम ललिता है मेरे स्वामी पाप दोष के कारण राक्षस हो गए हैं ,हे विप्रवर कोई उपाय बताइए।
ऋषि बोले भद्रे इस समय चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की कामदा नामक एकादशी तिथि आ रही है, जो सब पापों को हरने वाली है। यदि इसका व्रत करके तुम उस पुण्य को अपने पति के लिए दान कर दो तो वह पाप से मुक्त हो जाएंगे ।ऐसी बातें सुनकर ललिता को बड़ा हर्ष हुआ उसने एकादशी का उपवास करके द्वादशी के दिन श्री भगवान वासुदेव के समक्ष अपने पति के उद्धार के लिए यह वचन कहा कि मैंने कामदा एकादशी का व्रत किया है उसका पुण्य मेरे पति को मिले और वह राक्षस भाव से दूर हो जाए।
वशिष्ठ जी कहते हैं, हे महाराज दिलीप ललिता के इतना कहते हैं उसी क्षण ललित का पाप दूर हो गया । राक्षस भाव चला गया धर्म की प्राप्ति हुई। हे श्रेष्ठ वे दोनों पति-पत्नी पुण्य के प्रभाव से पहले की अपेक्षा और सुंदर बन कर के विमान पर आरूढ़ होकर विचरण करने लगे ।इस प्रकार कामदा एकादशी ब्रह्म हत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व का भी नाश करने वाली है।
राजन इसको पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ,रामानुज आश्रम, संत रामानुज मार्ग प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश।
कृपापात्र श्री श्री 1008 स्वामी श्री इंदिरा रमणाचार्य पीठाधीश्वर श्री जीयर स्वामी मठ जगन्नाथ पुरी, पीठाधीश्वर श्री नैमिषनाथ भगवान रामानुज कोट अष्टम भू बैकुंठ नैमिषारण्य।
नोट:- पारणा 30 मार्च को प्रातः 7:16 तक को
