सर्दियों का मिजाज बदलते ही प्रवासी पक्षियों ने दी दस्‍तक, हर साल 460 प्रजातियां आती हैं भारत

सर्दियों के बदले मिजाज के बाद भी भारत के कई इलाके प्रवासी पक्षियों की शरणस्थली बने हुए हैं। इनमें से भागलपुर के नवगछिया का दियारा क्षेत्र भी शामिल है। यहां प्रवासी पक्षी सर्दी के मौसम में भोजन की तलाश में आते हैं और अपना प्रवास स्थल बना लेते हैं। बात अगर पूरे देश की करें तो हर साल प्रवासी पक्ष‍ियों की करीब 460 प्रजातियां हमारे देश में बसेरा करने आती हैं।

दरअसल, सर्द मौसम में ठंडे प्रदेशों में झील और तालाब बर्फ से ढक जाते हैं। ऐसे में ये प्रवासी पक्षी भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं और एक देश से दूसरे देश तक पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि सर्दियों के मौसम में देश की तमाम झीलों पर व उसके आस-पास प्रवासी पक्षी आते हैं।

हर साल प्रवासी पक्ष‍ियों की करीब 460 प्रजातियां हमारे देश में बसेरा करने आती हैं।

झील में 3000 प्रवासी और 1000 स्थानीय पक्षियों ने ली शरण

बात अगर नवगछिया के खरीक प्रखंड की करें तो यहां स्थित जगतपुर झील इन दिनों प्रवासी और स्थानीय पक्षियों से भरा पड़ा है। यहां प्रवासी के पक्षियों की संख्या 153 बताई जा रही है। फिलहाल इस समय इस झील में 3000 प्रवासी और 1000 स्थानीय पक्षी शरण लिए हुए हैं। प्रवासी पक्षियों में मुख्य रूप से लालसर, नॉर्दन पिंटेल, नॉर्दन शोभलर, गढ़वाल, यूरेशियन कूट, गार्गेनी कॉटन, पिगनीगूज, कॉमन पोचार्ड और यूरेशियन विजॉन आदि पक्षी शामिल हैं। जबकि स्थानीय पक्षियों में ओरिएंटल डार्टर, छोटा और बड़ा पनकौआ लेसर विसलिंग डक, फेलूवलक विसलिंग डक, पर्पल हेरोन, ग्रे हेरोन, ग्रे हेडेड स्वाम्प हेन, वाइट ब्रेस्टेड हेन, स्प्रे (बाज प्रजाति का शिकारी पक्षी) ब्रोंज विंड जकाना आदि शामिल हैं।

20 एकड़ में फैली है जगतपुर की झील

जगतपुर की यह झील लगभग 20 एकड़ में फैली हुई है। यह पक्षी विहार वन विभाग की देखरेख में संचालित किया जा रहा है। जगतपुर झील में आने वाले प्रवासी पक्षियों के अध्ययन के लिए बीएनएचएस की ओर से पक्षियों के पैरों में छल्ला पहनाने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जगतपुर झील में रहने वाले पक्षियों को देखने के लिए रोजाना लोग यहां आ रहे हैं। इसके अलावा पक्षी और पर्यावरण प्रेमी के लिए यह स्थल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

अक्टूबर-नवंबर से प्रवासी पक्षियों का यहां होता है आगमन शुरू

वेटलैंड मित्र और पक्षी विशेषज्ञ दीपक कुमार बताते हैं कि जगतपुर झील में अक्टूबर-नवंबर से प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है। मार्च के बाद पक्षी यहां से जाना शुरू कर देते हैं। चीन, साइबेरिया, यूरोप और एशिया के कई देशों से पक्षी यहां आते हैं। यह सभी पक्षी भोजन और वातावरण की तलाश में यहां आते हैं। सबसे बड़ी बात प्रवासी पक्षी शाकाहारी होते हैं। इनका भोजन जलीय पौधा और वनस्पति होता है।

पक्षियों के अवैध शिकार के कारण कई प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर

उन्होंने पक्षियों के अवैध शिकार पर चिंता जताते हुए कहा कि पक्षियों के अवैध शिकार के कारण कई प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है, जिसमें प्रमुख रूप से बड़ा गरुड़ शामिल है। पक्षी विशेषज्ञ अरविंद मिश्रा की देखरेख में बड़ा गरुड़ के संरक्षण का काम भागलपुर जिले के कदवा में चल रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि अभी क्षेत्र में बड़े गरुड़ की संख्या 700 है। इसके अलावा कंबोडिया और असम में भी बड़ा गरुड़ के संरक्षण का काम चल रहा है।

460 प्रजातियां बाहर से भारत में आती हैं

बजट सत्र के पहले चरण में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो द्वारा 5 फरवरी 2021 को लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक भारत अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए प्रमुख पर्यावास है। विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा प्रकाशित साहित्य-सामग्रियों के अनुसार, प्रवासी पक्षियों की लगगभ 460 प्रजातियां भारत में आती हैं जिनमें 175 प्रजातियां मध्य एशियाई फ्लाइवे (सीएएफ) क्षेत्र से गुजरते हुए प्रवास के लिए लंबी दूरी तय करती हैं।

पिछले दशकों के दौरान प्रवासी पक्षियों की संख्या में कमी आने के कोई संकेत नहीं

सीएएफ मार्ग से आने वाले पक्षियों में इजिपश्न वल्चर, प्लोवर, डक, स्टॉर्क, आइबिस, फ्लेमिंगो, पोचार्ड, सोश्येबल लैपविंग, यूरोपियन रॉलर, यूरोपियन गोल्डन ओरियोल आदि शामिल है। ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है जिनसे संकेत मिलता है कि पिछले दशकों के दौरान प्रवासी पक्षियों की संख्या में कमी आई है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु कई पहल की गई हैं जिनमें कुछ इस प्रकार हैं….

1. प्रवासी पक्षियों के अनेक महत्वपूर्ण पर्यावासों को संरक्षित क्षेत्रों के रूप में घोषित किया गया है।

2. भारत में पाई जान वाली ब्लैक नैक्ड क्रेन, ग्रेट इंडियन बस्टार्ड, बार हेडेड गीस, हिमालयन ग्रिफॉन, सारस क्रेन, हॉबरा बस्टार्ड आदि जैसी पक्षियों की दुर्लभ और संकटापन्न प्रजातियों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध करके उन्हें उच्चतम स्तर का संरक्षण प्रदान किया गया है।

3. प्रवासी पक्षियों और उनके पर्यावासों के संरक्षण के उद्देश्य से वर्ष 2018 में एक मध्य एशियाई फ्लाइवे राष्ट्रीय कार्य योजना (2018-23) आरंभ की गई है।

4. प्रवासी पक्षियों सहित वन्यजीवों के संरक्षण को और सुदृढ़ बनाने के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत कई राष्ट्रीय उद्यानों और अभ्यारण्यों के आस-पास परि-संवेदनशील क्षेत्रों (ईएसजेड) की अधिसूचना जारी की गई है।

5. मंत्रालय द्वारा प्रावसी पक्षियों सहित वन्यजीवों पर रेखीय अवसंरचना के प्रभावों को कम करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

6. भारत, प्रवासी प्रजातियों संबंधी कन्वेंशन का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है और साइबेरियन क्रेन, रेप्टर आदि सहित प्रजातियों के संरक्षण संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

7. मंत्रालय द्वारा देश में सभी नमभूमियों के संरक्षण के लिए नमभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन नियम, 2017 को भी अधिसूचित किया गया है जो अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए भी विश्राम स्थल व प्रजनन स्थल हैं।

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