उजियार : जहां रुके थे, श्रीराम के पदकमल, उस गांव के साथ ‘शरीफ’ जोड़ने की कोशिश पर ग्रामीणों में आक्रोश
राक्षसी ताडका का बध करने के लिए महर्षि विश्वामित्र श्रीराम के साथ जब व्याघ्रसर (बक्सर) के इस पार गंगा किनारे पहुंचे तो सूर्योदय के पूर्व का उजाला फैलने लगा था। तभी से गंगा तट किनारे का यह गांव उजियार के नाम से जाना जाता है। गांव में उजियारनाथ का पौराणिक मंदिर भी है। अब एक वर्ग विशेष की ओर से इस ऐतिहासिक गांव के नाम में शरीफ जोडने की कोशिश हो रही है। इससे गांव का हिंदू समाज आक्रोशित है। दरअसल, दारुलउलूम रज्जाकिया रउफिया के नाम से संचालित एक मदरसा ने अपने साइन बोर्ड पर गांव का नाम बदलकर उजियार शरीफ लिख दिया है। यह मदरसा एदारा हजरत अब्दुल रउफ शाह एजुकेशनल सोसायटी के तहत संचालित है। गांव का एक बडा वर्ग उजियार के नाम में इस बदलाव की कोशिश का पुरजोर विरोध कर रहा है। ग्रामीण आश्चर्यचकित हैं कि आखिर उस ऐतिहासिक गांव के नाम का इस्लामीकरण करने की कोशिश क्यों रही है, जहां की पावन भूमि पर कभी प्रभु श्रीराम के पदकमल पडे थे। इस नाम परिवर्तन को लेकर पूरे गांव में बहस छिडने के साथ विरोध के स्वर मुखर हो उठे हैं। प्रभु श्रीराम के पग धरते उजियारा फैलने वाले इस पवित्र स्थान को ‘उजियार’ नाम उस काल से ही प्राप्त है। इस क्षेत्र में कहा गया है, ‘भोर भरौली भए उजियारा, बक्सर जाए ताड़का मारा’। जिस गांव में प्रख्यात इतिहासकार और मारीशस के पूर्व राजदूत भगवत शरण उपाध्याय जैसी महान विभूति जन्मी हो, जहां मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम ने अपने चरण कमल धरे, निर्मल गंगा के तट पर बसे गांव के नाम के साथ ‘शरीफ’ जोड़ा गया है? ‘शरीफ’ एक अरबी शब्द है, जो अच्छा है। लेकिन प्रभु श्रीराम से जुडे इस ऐतिहासिक गांव में बोर्ड लगाकर जिस तरह ‘उजियार शरीफ़’ लिखा गया है, वह अनुचित और विभेदकारी माना जा रहा है। उजियार भूमिहार व ब्राम्हण बाहुल्य गांव है। यहां हर विवाद शांति से एक साथ मिल बैठकर हल किया जाता रहा है। इस विषय पर उजियार के ग्राम प्रधान शोएब अंसारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यदि इस साइन बोर्ड पर गांव के नाम में शरीफ जोडने से आपत्ति है, तो इसे जल्द हटाने के लिए प्रयास किया जाएगा। सामाजिक सौहार्द उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे इसे किसी कीमत पर बिगडने नहीं देंगे। सभी पक्षों से बात करके इस मामले का सर्वमान्य हल निकालने की कोशिश रहेगी।
उजियार के कुछ प्रमुख लोगों की राय…
बब्लू राय ने यूपी एक्सप्रेस न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि गांव के नाम में शरीफ जोडना गलत है। इसे जल्द हटाया जाना चाहिए। साथ ही इस मदरसे की जांच भी जरूरी है। हरेराम राय पिंटु का कहना है कि, गांव के नाम में किसी तरह का बदलाव स्वीकार्य नहीं है। प्रतीत होता है कि उजियार में शरीफ जोडने का प्रयास करने वाले सामाजिक सौहार्द बिगाडने की मंशा रखते हैं। इसकी जांच की जानी चाहिए। भूषण राय का कहना है कि, ‘उजियार शरीफ कोई गांव नहीं है। हमारे गांव का नाम ‘उजियार’ है। इस नाम को बदलने अथवा इसमें कुछ जोडने का प्रयास पूर्ण रूप से गलत है। सरकारी दस्तावेज़ों में गांव का नाम उजियार है। यह कैसे बदल जा सकता है। गांव के नाम का इस्लामीकरण कतई मंजूर नहीं है।

Wha k mukhia se hi pta lagta hai wha k log kaise honge. Aapsi foot ka fayda wo log le rhe hai jinhone kbhi khud ka kuch na bna krk dusre bne hue per hi modification kia h.