आखिर युवाओं के लिए आत्महत्या ही अंतिम विकल्प क्यों ?

जिंदगी जीने के लिए है मेरे दोस्तों! इसे सुख-दुःख , हँसना-रोना, गिरना-उठना, संघर्षो के साथ बस चलते रहने का नाम है! जिंदगी तो बस अपने छोटे- बड़े लक्ष्यों को प्राप्त कर गौरान्वित होते हुए अपना हौसलाफजाई करते रहने नाम है | इसे केवल तुच्छ स्वाभिमान के हनन या छोटी असफलताओं पर अपनी मर्जी से खत्म करने का नाम नहीं है| आत्महत्या करने से क्या किसी भी समस्या का हल हो सकता है? जी नहीं ! यदि जिन्दा रहे तो सफल होने के बहुत सारे हसींन रास्ते हैं|

वास्तव में जिंदगी में कई समस्याओं के आने से एकाकीपन होने के कई अहम कारक हैं :-

परिवारिक समस्याए: घर में बच्चो को किसी भी बात पर दबाना , छोटे बड़े में फर्क करना , उनकी समस्याओ को न सुनना और तो और उनका मजाक उड़ाना, परिवार में आपसी झगड़ा जिससे बच्चो पर मानसिक दुष्प्रभाव पड़ना, बच्चो के व्यवहारिक परिवर्तन पर ध्यान न देना |

मनचाही करियर की समस्या : जिंदगी में जो लक्ष्य मिलना चाहिए, कुछ त्रुटि होने पर लक्ष्य का न मिलना भी, किसी परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर, छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा में आगे न होना पर भी आत्महत्या की संख्या में इजाफा हो रहे है |

प्रेम -प्रसंग समस्या : प्यार में धोखा मिलना या प्रेमी/प्रेमिका का किसी और से विवाह हो जाना , किसी व्यक्ति विशेष से ज्यादा उम्मीद करना और नाउम्मीद होना, इससे भी लोग मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर रहे है और कई प्रयासों के मामले भी आ रहे हैं |

आर्थिक समस्या : आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पैसों की कमी , और पूर्ति के लिए कर्ज में डूब जाना , धन का बचत न कर पाना भी आत्म हत्या का कारण बन रहा है |


सामाजिक समस्या : समाज में किसी कारणवश स्वयं में हीन् भावना महसूस होना, आत्म सम्मान खोने का डर , किसी पूर्ण हुए प्रोजेक्ट पर अपेक्षित सम्मान न मिलना, जिससे तनाव में आकर व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और उसे आत्महत्या के सिवा और कुछ नही सूझता जो सरासर गलत है |

मानसिक समस्या : किसी कारण वश व्यक्ति मानसिक दबाव में आकर भी ऐसे कदम उठाने लगते है |


इससे बचने के लिए क्या करे?
अपनी समस्यायों को अपने माता-पिता तथा मित्रों से बेहिचक बताए , अच्छे लोगो के बीच रहिये जिससे मष्तिस्क में नकारात्मक सोच का बढ़ावा न हो, मानसिक समस्यायों के लिए डॉक्टर से परामर्श ले, मन की शांति के लिए योप्ग व मेडिटेशन कीजिये , स्वयं के अलावा किसी से ज्यादा उम्मीद न रखिये, जिससे आपकी मानसिक तनाव बढे| जो पीछे छूट गया उसे छोड़ जिंदगी में आगे बढने की कोशिश कीजिये | अपने संघर्षो के साथ आगे बढने की कोशिश कीजिये | जिंदगी जीने के लिए है न कि उसे समाप्त करने के लिए |

संकलन :- विनीत त्रिपाठी

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