इंग्लिश कैलेंडर बदलने से हिंदू धर्म का वर्ष नहीं बदलता:– धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास
प्रतापगढ़ रामानुज आश्रम आइए जानते हैं 1 जनवरी का इतिहास किसने किया भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात। विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में राज करने के लिए सबसे पहले भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात किया जिससे हम अपनी महान दिव्य संस्कृति भूल जाएं और उनकी पाश्चात्य संस्कृति अपना लें जिसके कारण वे भारत में राज कर सकें।
नववर्ष उत्सव 4000 वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था
अपनी संस्कृति का ज्ञान न होने के कारण आज सनातनी हिन्दू भी 31 दिसंबर की रात्रि में एक-दूसरे को हैपी न्यू इयर कहते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं ।
नववर्ष उत्सव 4000 वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि (हिन्दुओं का नववर्ष ) भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी ये तिथि नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी, लेकिन रोम के तानाशाह जूलियस सीजर को भारतीय नववर्ष मनाना पसन्द नहीं आ रहा था इसलिए उसने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना किया।उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष यानि, ईसापूर्व 46 ईस्वी को 445 दिनों का करना पड़ा था । उसके बाद भारतीय नववर्ष के अनुसार छोड़कर ईसाई समुदाय उनके देशों में 1 जनवरी से नववर्ष मनाने लगे ।
लॉर्ड मैकाले ने सबसे पहले भारत का इतिहास बदलने का प्रयास किया
भारत देश में अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी की 1757 में स्थापना की । उसके बाद भारत को 190 वर्ष तक गुलाम बनाकर रखा गया। इसमें वो लोग लगे हुए थे जो भारत की ऋषि-मुनियों की प्राचीन सनातन संस्कृति को मिटाने में कार्यरत थे। लॉर्ड मैकाले ने सबसे पहले भारत का इतिहास बदलने का प्रयास किया जिसमें गुरुकुलों में हमारी वैदिक शिक्षण पद्धति को बदला गया । भारत का प्राचीन इतिहास बदला गया जिसमें भारतीय अपने मूल इतिहास को भूल गये और अंग्रेजों का गुलाम बनाने वाला इतिहास याद रह गया और आज कई भोले-भाले भारतवासी सृष्टि की रचना तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष नहीं मनाकर 1 जनवरी को ही नववर्ष मनाने लगे । हद तो तब हो जाती है जब एक दूसरे को नववर्ष की बधाई भी देने लग जाते हैं। क्या किसी भी ईसाई देशों में हिन्दुओं को हिन्दू नववर्ष की बधाई दी जाती है..??? किसी भी ईसाई देश में हिन्दू नववर्ष नहीं मनाया जाता है फिर भोले भारतवासी उनका नववर्ष क्यों मनाते हैं?
सनातन हिंदू धर्म ही सबसे पुराना धर्म है
इस वर्ष आने वाला नया वर्ष 2026 अंग्रेजों अर्थात ईसाई धर्म का नया साल है। हम ईसाई भाइयों का सम्मान करें किंतु हमें इसे नया वर्ष नहीं मानना चाहिए। हिन्दू धर्म सनातन धर्म का इस समय विक्रम संवत 2082 चल रहा है इससे स्पष्ट होता है कि सनातन हिंदू धर्म ही सबसे पुराना धर्म है इस विक्रम संवत से 5163 वर्ष पहले इस धरती पर भगवान विष्णु श्री कृष्ण के रूप में अवतरित हुए, और गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण संवत 5252 कलि संवत 5126 चल रहा है। उससे पहले भगवान राम और अन्य अवतार हुए ।यानी जब से पृथ्वी का प्रारंभ हुआ तब से सनातन हिंदू धर्म है कई करोड़ों वर्ष पुराना हमारा सनातन धर्म और कहां भारतीय अपनी गरिमा से गिर। मात्र 2024 साल पुराना नववर्ष मना रहे हैं।इससे स्पष्ट सिद्ध होता है कि सनातन हिंदू धर्म ही सबसे पुराना धर्म है ।
जरा विचार कीजिए सीधे-सीधे शब्दों में सनातन हिन्दू धर्म ही सब धर्मों की जननी है। यहाँ किसी धर्म का विरोध नहीं है परन्तु सभी भारतवासियों को बताना चाहते हैं कि इंग्लिश कैलेंडर के बदलने से हिन्दू वर्ष नहीं बदलता!
हिन्दू पंचांग का सनातन धर्म में महत्व
जब बच्चा पैदा होता है तो पंडित जी द्वारा उसका नामकरण कैलेंडर से नहीं हिन्दू पंचांग से किया जाता है । ग्रहदोष भी हिन्दू पंचाग से देखे जाते हैं और विवाह, जन्मकुंडली आदि का मिलान भी हिन्दू पंचाग से ही होता है । सभी व्रत, त्यौहार हिन्दू पंचाग से आते हैं। मरने के बाद तेरहवीं भी हिन्दू पंचाग से ही देखा जाता है। मकान का उद्घाटन, जन्मपत्री, स्वास्थ्य रोग और अन्य सभी समस्याओं का निराकरण भी हिन्दू कैलेंडर {पंचाग} से ही होता है। आप जानते हैं कि रामनवमी, जन्माष्टमी, होली, दीपावली, राखी, भाई दूज, करवा चौथ, एकादशी, शिवरात्री, नवरात्रि, दुर्गापूजा सभी विक्रमी संवत कैलेंडर से ही निर्धारित होते हैं । इंग्लिश कैलेंडर में इनका कोई स्थान नहीं होता।
सोचिये! आपके इस सनातन धर्म के जीवन में इंग्लिश नववर्ष या कैलेंडर का स्थान है कहाँ है?
अतः हिन्दुस्तानी अपनी मानसिकता को बदले, विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने और चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन ही नूतन वर्ष मनाये।

